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lirik lagu swaroop khan & jaspreet jasz – bahut hua samman (from “mukkabaaz”) (edm)

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सूखी रोटी मुंह में ठूंसे पेट पे मुक्का मार दिए
हमरा बटुआ… हाए…
हमरा बटुआ हमसे चोरी उल्टा हमें उधार दिए

सर पे पत्थर बांध के औंधे मुंह फेंके पानी में
हमरे ही किरदार को छीने हमरी ही कहानी में
अरे जीते न जीते लड़ के रहेंगे
अब न सुनेंगे कह के रहेंगे
काहे का गुणगान तुम्हारी ऐसी तैसी
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी ऐसी तैसी
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी
अरे खून के छींटा…
खून के छींटा उड़ा जो अपना गिरा है जाकर दूर
गिरा है जाकर दूर
अरे गले में घंटी बांध के हमको फांसी दिए हुजूर
सांचा लेके हमको ढाला
आवाज़ों के कुएं में डाला
चाकर बनाके तलवा चटाया
खंजर देके पानी कटाया

जो सिखाया वो न करेंगे अब न सुनेंगे कह के रहेंगे
जबरन बने महान तुम्हारी ऐसी तैसी…
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी…
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी…
बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी
बंदूक की नल्ली सामने रक्खे बोले नचके दिखा
रे बोले नचके दिखा…
रे बोले नचके दिखा
रे काली स्याही मुंह पर पोते बोले सजके दिखा
रे बोले सजके दिखा…
रे बोले सजके दिखा
भीतर भीतर अब न घुटेंगे
अब न सुनेंगे कह के रहेंगे
वापस लो अभिमान तुम्हारी ऐसी तैसी…
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी…
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी…
जीवन चाटा दीमक जैसा
सपने कुतरे चूहे जैसे
जीवन चाटा दीमक जैसा
सपने कुतरे चूहे जैसे
अरे घड़ियालों के आंसू तुम्हारे
भेड़ के भेस में गीदड़ जैसे
अरे सांप की जीभ से फुंकारो तुम
बोले फूटें मिसरी जैसे
मिसरी जैसे… मिसरी जैसे…
मारो काटो नहीं डरेंगे…
नहीं डरेंगे नहीं डरेंगे…
अब न सुनेंगे कह के रहेंगे…
भइय्या हथेली पर है जान…
ऐ तुम्हारी ऐसी तैसी…
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी ऐसी तैसी
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी…