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lirik lagu a.r. rahman, arijit singh & sameer samant - sunhari kirne

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[arijit singh “sunhari kirne” के बोल]

[chorus]
ये रोशन, सुनहरी~सी, झिलमिलती किरणें
ये पहले पहर की~सी जगमगती किरणें
ये चिड़ियों के संग~संग चहकती~सी किरणें
ये फूलों के रंग~रंग महकती~सी किरणें
दिलों में उम्मीदें जगाती~सी किरणें
ये ले आती हैं रात के जाते~जाते
सवेरे, सहर, भोर, सुबह, प्रभाते
ये सब लफ़्ज़ लगते हैं सुने~सुनाए
हम रातों के बाशिंदे, सोए~सुलाए

[verse]
ये है नींद, बेहोशी है या नशा है
ये सुस्ती, ये मस्ती, ख़ुदा जाने क्या है
तूफ़ान आए या हो कोई आँधी
हो गौतम या नानक, भगत सिंह या गांधी
बहुत कोशिश की, नहीं खोल पाए
आँखों पे जो पट्टियाँ हमने बाँधी
हम सब हैं तारीख़~रातों के आदी
हमें रात ही में मिली थी आज़ादी
हमको तो बस ओढ़े रखनी है चादर
हो रेशम या मलमल या खाकी या खादी
ये अंधियारी चादर या कोई कफ़न है
वो सूरज न जाने कहाँ पर दफ़न है
अगर खो गया है, उसे ढूँढ ला दो
अगर सो गया है, तो उसको जगा दो
जो बेहोश है तो ज़रा होश ला दो
‘गर मर चुका है तो मिलकर जला दो
जलेगा तो कुछ रोशनी होगी शायद
दुनिया में कुछ ख़लबली होगी शायद
कहानी ये तुमने सुनी होगी शायद
कुछ सुबहें यूँ भी बनी होंगी शायद
(के कुछ सुबहें यूँ भी बनी होगी शायद)
के कुछ सुबहें यूँ भी बनी होगी शायद
(के कुछ सुबहें यूँ भी बनी होगी शायद)
[chorus]
ये रोशन, सुनहरी~सी, झिलमिलती किरणें
ये पहले पहर की~सी जगमगाती किरणें
ये चिड़ियों के संग~संग चहकती~सी किरणें
ये फूलों के रंग~रंग महकती~सी किरणें
दिलों में उम्मीदें जगाती~सी किरणें
ये ले आती हैं रात के जाते~जाते
सवेरे, सहर, भोर, सुबह, प्रभाते
ये सब लफ़्ज़ लगते हैं सुने~सुनाए
हम रातों के बाशिंदे, सोए~सुलाए


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